Class 12th Political Science Ncert Solutions in Hindi Chapter 2 | दो ध्रुवीयता का अन्त

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Class 12th Political Science Ncert Solutions in Hindi Chapter 2 | दो ध्रुवीयता का अन्त

Ncert Solutions For Class 12th Political Science in Hindi | Chapter – 2 दो ध्रुवीयता का अन्त

अध्याय 2

दो ध्रुवीयता का अन्त [The Collapse of Bipolarity]

 

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • पूँजीवादी तथा साम्यवादी विश्व के मध्य विभाजन की प्रतीक 150 किमी से भी अधिक लम्बी बर्लिन की दीवार पश्चिमी तथा पूर्वी बर्लिन को अलग-अलग करती थी।
  • अक्टूबर 1989 में सोवियत संघ ने घोषणा की थी कि ‘वारसा समझौते’ के सदस्य अपना भविष्य तय करने के लिए स्वतन्त्र हैं।
  • 1961 में निर्मित बर्लिन की दीवार को जनसाधारण ने 9 नवम्बर, 1989 को तोड़ दिया।
  • मिखाइल गोर्बाचेव ने पश्चिम के देशों के साथ सम्बन्धों को सामान्य बनाने, सोवियत संघ को लोकतान्त्रिक रूप देने एवं सुधार करने का फैसला लिया जिसका व्यापक प्रभाव पड़ा।
  • सोवियत गुट के पूर्वी यूरोप के देशों के लोगों ने अपनी सरकारों एवं सोवियत नियन्त्रणका विरोध करना प्रारम्भ किया, जिससे पूर्वी यूरोप की साम्यवादी सरकारें गिर गई। मार्च 1990 में लिथुआनिया स्वतन्त्रता की घोषणा करने वाला प्रथम सोवियत गणराज्य बना।
  • 1991 में बोरिस येल्तसिन के नेतृत्व में सोवियत संघ के तीन बड़े गणराज्यों-रूस, यूक्रेन तथा बेलारूस ने सोवियत संघ की समाप्ति की घोषणा की थी। सोवियत संघ के 15 गणराज्यों में रूसी गणराज्य का प्रत्येक क्षेत्र में प्रभुत्व था, अतः उसे
  • संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की स्थायी सीट हासिल हो गई। सोवियत संघ के पतन का प्रमुख कारण सोवियत संघ की राजनीतिक एवं आर्थिक संस्थाओं की आन्तरिक कमजोरी की वजह से जनसाधारण की आकांक्षाएँ पूर्ण न हो पाना था।
  • सोवियत संघ के विघटन के फलस्वरूप संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ के मध्य चल रहा शीत युद्ध समाप्त हो गया। सोवियत संघ के विघटन से जहाँ द्विध्रुवीयता का अन्त हुआ वहीं इस घटनाचक्र के बाद अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति बन गया।
  • हालांकि भारत ने साम्यवादी रह चुके सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण सम्बन्ध स्थापित किए लेकिन हमारे रूस के साथ सम्बन्ध सर्वाधिक मधुर हैं।
  • भारत एवं रूस बहुध्रुवीय विश्व की कल्पना को साकार स्वरूप देना चाहते हैं।

 

पाठान्त प्रश्नोत्तर

 

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प्रश्न 1. सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति के बारे में निम्नलिखित में से कौन-या कथन गलत है?

(क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी

(ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व / नियन्त्रण होना

(ग) जनता को आर्थिक आजादी थी

(घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियन्त्रण राज्य करता था।

उत्तर- (ग) जनता को आर्थिक आजादी थी।

प्रश्न 2. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार सजाएँ-

(क) अफ़गान संकट

(ख) बर्लिन दीवार का गिरना

(ग) सोवियत संघ का विघटन

(घ) रूसी क्रान्ति।

उत्तर- (घ) रूसी क्रान्ति, (क) अफगान संकट, (ख) बर्लिन-दीवार का गिरना, (ग) सोवियत संघ का विघटन।

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प्रश्न 3. निम्नलिखित में कौन-सा सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है?

(क) संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई अन्त

(ख) स्वतन्त्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का जन्म

(ग) विश्व व्यवस्था के शक्ति सन्तुलन में बदलाव

(घ) मध्यपूर्व में संकट

उत्तर- (घ) मध्यपूर्व में संकट

प्रश्न 4. निम्नलिखित में मेल बैठाएँ-

(1) मिखाइल गोर्बाचेव                   (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी

(2) शॉक थेरेपी                           (ख) सैन्य समझौता

(3) रूस                                       (ग) सुधारों की शुरुआत

(4) बोरिस येल्तसिन                       (घ) आर्थिक मॉडल

(5) वारसा                                      (ङ) रूस के राष्ट्रपति

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उत्तर-

(1) मिखाइल गोर्बाचेव         (ग) सुधारों की शुरुआत

(2) शॉक थेरेपी                    (घ) आर्थिक मॉडल

(3) रूस                               (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी

(4) बोरिस येल्तसिन             (ङ) रूस के राष्ट्रपति

(5) वारसा कारा                    (ख) सैन्य समझौता

 

 

प्रश्न 5. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली ———की विचारधारा पर आधारित थी।

(ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबन्धन ————–था ।

(ग)  —————- “ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।

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(घ) ..———-….’पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।

(ङ) ———————का गिरना शीत युद्ध के अन्त का प्रतीक था।

 

उत्तर- (क) समाजवाद, (ख) वारसा पैक्ट, (ग) कम्युनिस्ट, (घ) मिखाइल गोर्बाचेव, (ङ) बर्लिन की दीवार।

 

प्रश्न 6. सोवियत अर्थव्यवस्था को किसी पूँजीवादी देश जैसे संयुक्त राज्य अमरीका की अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली किन्हीं तीन विशेषताओं का जिक्र कीजिए।

उत्तर- सोवियत अर्थव्यवस्था को अमेरिकी अर्थव्यवस्था से अलग करने वाली तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार है-

(1) सोवियत अर्थव्यवस्था पूँजीवादी देशों की अर्थव्यवस्था से अलग है क्योंकि इसमें उद्योगों को ज्यादा महत्त्व नहीं दिया गया था जबकि पूँजीवादी अमेरिकी व्यवस्था में उद्योग- धन्धों को अत्यधिक महत्त्व प्रदान किया गया।

(2) सोवियत अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध तथा राज्य के नियन्त्रण में थी जबकि पूँजीवादी देशों में विशेष रूप से अमेरिका में मुक्त व्यापार नीति को अपनाया गया।

(3) सोवियत अर्थव्यवस्था में उत्पादन एवं वितरण के साधनों पर शासकीय नियन्त्रण था। जबकि पूँजीवादी देशों ने निजीकरण को अपनाया था।

 

प्रश्न 7. किन बातों के कारण गोर्बाचेव सोवियत संघ में सुधार के लिए बाध्य हुए?

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उत्तर- गोर्बाचेव निम्न कारणों की वजह से सोवियत संघ में सुधार हेतु बाध्य हुए थे- (1) सोवियत संघ अपने नागरिकों की राजनीतिक एवं आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा न कर सका।

(2) धीरे-धीरे सोवियत संघ में नौकरशाही हावी होती चली जा रही थी तथा सम्पूर्ण राज्यव्यवस्था को नौकरशाही अपने मकड़जाल में फंसाती चली जा रही थी।

(3) हालांकि सोवियत संघ में 15 गणराज्य थे लेकिन वास्तविक रूप से इनमें रूस का प्रत्येक मामले में प्रभुत्व था तथा अन्य गणराज्य स्वयं को उपेक्षित एवं अपमानित महसूस करते थे।

(4) सोवियत संघ में पारिश्रमिक लगातार बढ़ने के बावजूद भी वह उत्पादकता एवं प्रौद्योगिकी में पाश्चात्य देशों से काफी पीछे था जिसके फलस्वरूप वहाँ उपभोक्ता वस्तुओं की कमी तथा खाद्यान्नों का आयात बढ़ता ही चला गया।

(5) हथियार निर्माण की प्रतिस्पर्द्धा में सोवियत संघ की अमेरिका से प्रतियोगिता चरम पर थी जिसका उसे भारी मूल्य चुकाना पड़ा। हथियारों पर अत्यधिक व्यय होने की वजह से सोवियत संघ आधारभूत ढाँचे तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगातार पिछड़ता ही चला गया।

(6) सोवियत प्रणाली के सत्तावादी हो जाने की वजह से जन-साधारण का जीवन कठिन होता चला जा रहा था।

प्रश्न 8. भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के क्या परिणाम हुए?

उत्तर- भारत जैसे देशों के लिए सोवियत संघ के विघटन के परिणामों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) सोवियत संघ के विघटन के बाद भारतीय विदेश नीति में बदलाव आया तथा उसने सोवियत संघ से अलग हुए सभी गणराज्यों से नए परिपेक्ष्य में अपने सम्बन्ध स्थापित कर अपनी छविको अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर और अधिक सुधारा

(2) सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् भारत जैसे देशों ने पूँजीवादी अर्थव्यवस् को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शक्तिशाली एवं महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था मानते हुए उदारीकरण वैश्वीकरण की नीतियों को अपनाया।

(3) भारत जैसे देशों ने मिश्रित अर्थव्यवस्था को त्यागकर नवीन उदारवादी आर्थिक नीति को अपनाया।

(4) सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत जैसे देशों के लिए किसी राष्ट्र से अटूट सम्बन्ध स्थापित करने हेतु किसी गुट विशेष में शामिल होने की बाध्यता नहीं रही।

(5) सोवियत संघ के विघटन के परिणामस्वरूप शीत युद्ध का अन्त हुआ जिसकी वजह से हथियारों की प्रतिस्पर्द्धा भी समाप्त हो गई।

 

प्रश्न 9. शॉक थेरेपी क्या थी? क्या साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का यह सबसे बेहतर तरीका था ?

उत्तर– शॉक थेरेपी का आशय (अर्थ) – साम्यवाद के पतनोपरान्त पूर्व सोवियत संघ के गणराज्य एक सत्तावादी समाजवादी प्रणाली से लोकतान्त्रिक पूँजीवादी व्यवस्था तक के पीड़ादायी संक्रमण काल से गुजरे। रूस, मध्य एशियाई गणराज्य तथा पूर्वी यूरोपीय देशों में पूँजीवाद की तरफ से संक्रमण का एक विशेष प्रारूप अपनाया गया। विश्व बैंक तथा अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित इस प्रारूप (मॉडल) को ‘शॉक थेरेपी’ अर्थात् ‘ आघात पहुँचाकर उपचार ‘करना’ कहा गया।

‘शॉक थेरेपी’ में सम्पत्ति पर निजी स्वामित्व राज्य सम्पदा के निजीकरण तथा व्यावसायिक स्वामित्व के ढाँचे को अपनाना, पूँजीवादी प्रणाली से कृषि करना, मुक्त व्यापार की पूर्णरूपेण अपनाना, वित्तीय खुलापन एवं मुद्राओं की पारस्परिक परिवर्तनशीलता को अपनाना इत्यादि शामिल है। ‘शॉक थेरेपी’ की साम्यवाद से पूँजीवाद की तरफ संक्रमण का सर्वाधिक श्रेष्ठ तरीका नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि सभी प्रकार के पूँजीवादी सुधारों को तुरन्त ही लागू किए जाने के फलस्वरूप ही सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था पूर्णरूपेण चरमरा कर तहस-नहस हो गई।

सबसे उत्तम तरीका यह होता है कि पूँजीवादी सुधार तुरन्त ही किए जाने के स्थान पर धीरे-धीरे होने चाहिए। समस्त बदलावों को सोवियत संघ पर लादने का नकारात्मक प्रभाव पड़ा। अतः ऐसे परिवर्तनों को जनसाधारण पर थोपकर उनको आघात देना सर्वथा अनुचित ही था।

 

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प्रश्न 10. निम्नलिखित कथन के पक्ष या विपक्ष में एक लेख लिखें-“दूसरी दुनिया के विघटन के बाद भारत को अपनी विदेश नीति बदलनी चाहिए और रूस जैसे परम्परागत मित्र की जगह संयुक्त राज्य अमरीका से दोस्ती करने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।”

उत्तर- उक्त कथन के पक्ष में हम निम्नलिखित तर्क दे सकते हैं-

(1) वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय गुट निरपेक्षता पूर्णरूपेण लाभप्रद नहीं है क्योंकि

‘विश्व में अब दो महाशक्तियों की जगह एकमात्र सर्वोच्च शक्ति अमेरिका ही है। अतः अब भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ही अपने सम्बन्ध मजबूत करने चाहिए तथा इसमें ही देश का हित है।

(2) भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ही उदारीकरण की नीति पर चल रहे हैं। इन दोनों ही देशों में शक्तिशाली लोकतन्त्र है। हमारे देश भारत ने अमेरिका के साथ सम्बन्धों में मधुरता लाकर सामान्यीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है।

(3) भारत तथा संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ही देशों ने सितम्बर 2001 के अमेरिकी आतंकी हमले के पश्चात् मिलकर आतंकवाद को जड़ सहित समाप्त करने की योजना बनाई है।

(4) समय-समय पर अमेरिका ने भारत की विभिन्न प्रकार से सहायता की है तथा भारत भी उसके साथ व्यापारिक सम्बन्धों में वृद्धि करने को उत्सुक है।

(5) सोवियत संघ के बिखराव के पश्चात् विश्व में एकमात्र सर्वोच्च शक्ति अमेरिका के साथ हमें सम्बन्धों को नवीन ऊँचाइयों पर ले जाना चाहिए जिससे देश का हित हो सके। उक्त से स्पष्ट है कि समय तथा परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए भारतीय विदेश नीति में पर्याप्त बदलाव करके ही देश का हित होगा।

 

परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

बहुविकल्पीय

  1. बोल्शेविक क्रान्ति हुई थी

(क) रूस में      (ख) फ्रांस में

(ग) इंग्लैण्ड में      (घ) जापान में।

  1. बोल्शेविक क्रान्ति का नेतृत्वकर्त्ता था-

(क) चर्चिल          (ख) लेनिन

(ग) स्टालिन        (घ) लुश्चेव ।

  1. बोल्शेविक क्रान्ति कब हुई थी ?

(क) 1911                 (ख) 1914

(ग) 1917                 (घ) 1989.

  1. शॉक थेरेपी अपनाई गई थी-

(क) 1988 में          (ख) 1989 में

(ग) 1990 में             (घ) 1992 में

  1. सोवियत संघ के विघटन हेतु उत्तरदायी नेता थे-

(क) बोरिस येल्तसिन        (ख) निकिता ख्रुश्चेव

(ग) स्टालिन                    (घ) मिखाइल गोर्बाचेव

 

 

  1. रूसी संसद ने सोवियत संघ से अपनी स्वतन्त्रता घोषित की थी-

(क) फरवरी 1990 में          (ग) जून 1990 में

(ख) मार्च 1990 में             (घ) अगस्त 1991 में।

  1. सोवियत संघ में निम्नांकित में से किस फिल्मी अभिनेता को सर्वाधिक पसन्द किया गया ?

(क) राज कपूर                  (ख) शशी कपूर

(ग) शम्मी कपूर                (घ) रनवीर कपूर।

  1. कठोर द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था का दशक माना जाता है-

(क) 1935-45                 (ख)  1945-1955

(ग) 1955-1965              (घ) 1975-1985.

 

उत्तर- 1. (क) रूस में, 2. (ख) लेनिन, 3. (ख) 1914, 4. (ग) 1990 में, 5. (घ) मिखाइल गोर्बाचेव, 6. (ग) जून 1990 में, 7. (क) राज कपूर, 8. (ख) 1945-1955.

 

रिक्त स्थानों की पूर्ति

 

  1. बर्लिन की दीवार———-में खड़ी की गई थी।
  2. सोवियत संघ के विघटन के बाद उसके गणराज्य ——————तक चलता रहा।
  3. सोवियत संघ———- गणराज्यों से मिलकर बना था।. में गृहयुद्ध दस वर्षों
  4. द्विध्रुवीय व्यवस्था में एक गुट का प्रतिनिधित्व अमेरिका करता था जबकि दूसरे का ————–करता था।
  5. द्विध्रुवीय व्यवस्था का पतन————– के बाद में शुरू हुआ।
  6. द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था में प्रतिपक्षी राज्य होते हैं, जो परस्पर एक-दूसरे को अपना ————-समझते हैं।
  7. द्वि- ध्रुवीकरण स्थापित होने का कारण महाशक्तियों की संख्या ——-में था।
  8. चेकोस्लाविया के जन-विद्रोह का दमन —————–ने किया था।

 

उत्तर- 1. 1961, 2. ताजिकिस्तान, 3. पन्द्रह, 4. सोवियत संघ, 5. 1955, 6. शत्रु 7. कमी, 8. लिओनिद ब्रेझनेव ।

 

सत्य / असत्य

 

  1. बर्लिन की दीवार को 1989 में पूर्वी जर्मन की जनसाधारण ने गिराया।
  2. शॉक थेरेपी से सम्पूर्ण रूसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो गई।
  3. रूस तथा भारत का स्वप्न बहुध्रुवीय विश्व का है।
  4. सोवियत संघ के विघटन में केन्द्रीय भूमिका का निर्वहन बोरिस येल्तसिन ने किया।
  5. 1991 से विश्व में एक ध्रुवीयता की स्थिति विद्यमान है।
  6. रूस की राजधानी ताशकंद है।
  7. मार्च 2014 में क्रीमिया यूक्रेन से अलग होकर संयुक्त राज्य अमेरिका में मिल गया।
  8. सोवियत संघ के पतन की वजह से गुट निरपेक्ष आन्दोलन की प्रासंगिकता पर प्रश्न चिन्ह लग गया।

 

उत्तर- 1. सत्य, 2. असत्य, 3. सत्य, 4. सत्य, 5. सत्य, 6. असत्य, 7. सत्य, 8. सत्य।

 

जोड़ी मिलाइए

 

                      ‘क’                                                                                   ‘ख’

  1. वर्तमान विश्व में एकमात्र महाशक्ति                                      (i) ब्लादिमीर लेनिन
  2. सम्पूर्ण विश्व में साम्यवाद के प्रेरणास्रोत                                (ii) दो
  3. सोवियत संघ के अन्तिम राष्ट्रपति                                        (iii) स्टीवेन जे. रोजेन तथा वाल्टर
  4. द लॉजिक ऑफ इण्टरनेशनल रिलेशन्स एस. जोन्स           (iv) संयुक्त राज्य अमेरिका
  5. द्विध्रुवीय व्यवस्था के प्रकार                                                (v) मिखाइल गोर्बाचेव

 

उत्तर- 1. → (iv), 2. (i), 3. (v), 4. (iii), 5.→ (ii).

 

एक शब्द / वाक्य में उत्तर

 

  1. द्विध्रुवीयता के उदय का कारण लिखिए।
  2. द्वि- ध्रुवीकरण में कौन-कौनसे दो गुट थे ?
  3. युद्धोत्तर काल में द्वि-ध्रुवीकरण स्थापित होने का कारण था ?
  4. द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था के दो प्रकार बताइए।
  5. कम्युनिस्ट पार्टी ने सोवियत संघ पर कितने वर्षों तक शासन किया ?
  6. पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध में कौनसी क्रान्ति हुई ?

 

उत्तर- 1. दो महाशक्तियों का उद्भव, 2. अमेरिका तथा सोवियत संघ, 3. परमाणु हथियारों की दौड़, 4. कठोर द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था तथा शिथिल द्विध्रुवीय व्यवस्था, 5. 70 वर्ष, 6. 1917 की रूसी क्रान्ति ।

 

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. ध्रुव का क्या अर्थ है ?

उत्तर- ध्रुव का तात्पर्य महान अथवा उच्च शक्ति है।

 

प्रश्न 2. ध्रुवीकरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- ध्रुवीकरण व्यवस्था का तात्पर्य सैन्य शक्ति के केन्द्रों से है।

 

प्रश्न 3. द्वि-ध्रुवीकरण का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- द्विध्रुवीय व्यवस्था का तात्पर्य ऐसी व्यवस्था से है, जिसमें दो शक्तियों का अस्तित्व होता है।

 

प्रश्न 4. द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था में प्रत्येक गुट किस बात हेतु इच्छुक रहता है?

उत्तर- द्विध्रुवीय व्यवस्था में प्रत्येक गुट दूसरे की शक्ति एवं प्रभाव को सीमित करने तथा अपनी शक्ति को बढ़ाने का इच्छुक रहता है।

 

प्रश्न 5. सोवियत राजनीतिक प्रणाली किस विचारधारा पर आधारित थी?

उत्तर- सोवियत राजनीतिक प्रणाली समाजवाद तथा साम्यवादी विचारधारा पर आधारित थी।

 

प्रश्न 6. पूर्व सोवियत संघ में कितने गणराज्य तथा स्वायत्तशासी गणराज्य सम्मिलित

उत्तर- पूर्व सोवियत संघ में 15 संघीय गणतन्त्र, 20 स्वायत्तशासी गणतन्त्र तथा स्वायत्तशासी क्षेत्र शामिल थे।

 

प्रश्न 7. किस राज्य को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य स्वीकार किया गया ? स्वतन्त्रता की घोषणा करने वाला पहला सोवियत गणराज्य कौन था ?

उत्तर- सोवियत संघ के उत्तराधिकारी राज्य के रूप में रूस का प्रादुर्भाव हुआ। स्वतन्त्रता की घोषणा भी सर्वप्रथम रूस द्वारा ही की गई थी।

 

प्रश्न 8. रूस ने किस प्रकार की अर्थव्यवस्था को अपनाया ?

उत्तर – सोवियत संघ के राजनीतिक उत्तराधिकारी रूस ने उदारवादी अर्थव्यवस्था अपनाया और वहाँ तेजी से निजीकरण की प्रक्रिया का विकास हुआ।

 

प्रश्न 9. सोवियत प्रणाली के कोई दो दोष (अवगुण) लिखिए।

उत्तर– (1) धीरे-धीरे सोवियत प्रणाली समाजवादी हो गई जिसमें नौकरशाही का प्रभाव बढ़ा,

(2) सोवियत संघ में एकदलीय (कम्युनिस्ट पार्टी) का शासन था जो किसी के भी प्रतिउत्तरदायी नहीं था।

 

  1. सोवियत संघ के विघटन के दो कारण लिखिए।

उत्तर- (1) तत्कालीन सोवियत राष्ट्रपति गोवि द्वारा चलाए गए आर्थिक एवं राजनीतिक” सुधार कार्यक्रम तथा (2) सोवियत गणराज्यों में लोकतान्त्रिक एवं उदारवादी भावनाएँ पैदा होना ।

 

लघु उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. कठोर द्वि-ध्रुवीय व्यवस्था की विशेषताओं को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर- रोजेन एवं जोन्स द्वारा द्विध्रुवीय व्यवस्था की निम्नलिखित विशेषताओं का उल्लेख किया गया है-

(1) कठोर द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था में समस्त शक्तिशाली देश किसी-न-किसी गुट में सम्मिलि हो जाते हैं तथा कोई शक्तिशाली राष्ट्र की भूमिका के लिए नहीं रहता है।

(2) कठोर द्विध्रुवीय व्यवस्था का यह अर्थ नहीं लिया जाना चाहिए कि दोनों शक्ति पूर्णरूपेण विद्यमान हो।

(3) कठोर द्विध्रुवीय व्यवस्था में प्रतिस्पद्ध करने वाली शक्तियों का लक्ष्य अन्तर्राष्ट्र क्षेत्र में समानता न होकर सर्वश्रेष्ठ शक्ति सम्पन्न बनने का होता है।

(4) कठोर द्वि- ध्रुवीय व्यवस्था में एक गुट दूसरे गुट को समाप्त करना चाहता है अर्थात् इसका आधार प्रबलतम शत्रुता की भावना होती है।

प्रश्न 2. द्वि- ध्रुवीकरण स्थापित होने के कारणों को संक्षेप में लिखो।

उत्तर- द्वि- ध्रुवीकरण स्थापित होने के प्रमुख रूप से निम्नलिखित कारण थे-

(1) द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् महाशक्तियों की संख्या घटकर सिर्फ दो रह ग थी।

(2) सोवियत संघ तथा अमेरिका के बीच राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धा की विशिष्ट भावना बढ़ गयी थी।

(3) सोवियत संघ एवं अमेरिका में छिड़े शीतयुद्ध के फलस्वरूप दोनों गुटों ने अपने-अपने अनुयायियों की संख्या में बढ़ोत्तरी करना प्रारम्भ कर दिया था।

(4) सोवियत संघ का परमाणु शक्ति सम्पन्न हो जाना भी विश्व में द्विध्रुवीय व्यवस्था को बढ़ाने हेतु उत्तरदायी कारक था।

 

प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारणों को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर- सोवियत संघ के विघटन के प्रमुख कारण निम्न प्रकार थे-

(1) गोर्बाचेव की खुलेपन की अवधारणा ने सोवियत संघ के गणराज्यों को स्वतन्त्र होने की प्रेरणा दी थी।

(2) सोवियत संघ ने बाल्टिक गणराज्यों का रूस के अन्तर्गत विलय उनकी इच्छा के खिलाफ किया था।

(3) सोवियत संघ में खाद्यान्नों का संकट पैदा हो गया था।

(4) सोवियत संघ के पतन का एक कारण अफगान संकट भी बना।

(5) सोवियत अर्थव्यवस्था बदहाल थी तथा साम्यवादी दल की शक्ति लगातार कम होती चली जा रही थी।

 

प्रश्न 4. सोवियत प्रणाली क्या थी?

 

उत्तर- समाजवादी सोवियत गणराज्य रूस में हुई 1917 की समाजवादी क्रान्ति के पश्चात् अस्तित्व में आया। यह क्रान्ति पूँजीवादी व्यवस्था के विरोध स्वरूप हुई थी और समाजवाद के आदर्शो एवं समतामूलक समाज की जरूरत से प्रेरित थी। यह निजी सम्पत्ति का अन्त करके तथा समाज को समानता के सिद्धान्त पर लड़ने का सबसे बड़ा प्रयत्न था। सोवियत प्रणाली निर्माताओं ने ऐसा करने के लिए राज्य तथा पार्टी की संस्था को प्राथमिक महत्त्व दिया। सोविय राजनीतिक प्रणाली की आधारशिला कम्युनिस्ट पार्टी ही थी और इसमें किसी अन्य राजनीतिक दल अथवा विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं थी।

 

प्रश्न 5. शॉक थेरेपी के किन्हीं चार परिणामों को संक्षेप में लिखिए।

उत्तर– शॉक थेरेपी के चार प्रमुख परिणाम निम्न प्रकार हैं-

(1) शॉक थेरेपी से सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था चरमरा गई तथा जन साधारण को बरबादी का दौर देखना पड़ा।

(2) शॉक थेरेपी से मुद्रा स्फीति में बढ़ोत्तरी हुई। रूसी मुद्रा रूबल के मूल्य में अत्यधिक

गिरावट आई। मुद्रास्फीति इतनी अधिक बड़ी कि जमा पूँजी भी चली गई।

(3) निजीकरण से नवीन विषमताओं का प्रादुर्भाव हुआ और गरीब एवं अमीर के बीच गहरी खाई और अधिक चौड़ी हो गई।

(4) हालांकि आर्थिक बदलावों को अत्यधिक प्राथमिकता दी गई तथा उसे पर्याप्त स्थान भी दिया गया लेकिन लोकतान्त्रिक संस्थाओं के निर्यात का कार्य ऐसी प्राथमिकता के नहीं हो सका।

 

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

 

प्रश्न 1. युद्धोत्तर काल में द्वि-धुवीकरण स्थापित होने के कारणों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- युद्धोत्तर काल में द्वि-ध्रुवीकरण स्थापित होने के कारण युद्धोत्तर काल में द्वि-ध्रुवीकरण स्थापित होने के प्रमुख कारणों को संक्षेप में निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-

(1) संख्यात्मक दृष्टिकोण से महाशक्तियों में कमी-दुनिया में दूसरा महाबुद्ध ल जाने से पहले सात महाशक्तियाँ- इटली, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, अमेरिका तथा सोवियत संघ थीं। इस युद्ध के पश्चात् जर्मनी एवं इटली तो पराजय की वजह से एकददी बिखर गईं तथा मित्र राज्यों की विजय के बाद भी जन एवं धन की अत्यधिक क्षति हुई। सिर्फ अमेरिका तथा सोवियत संघ ही शक्तिशाली राज्यों के रूप में शेष बचे थे।

(2) अमेरिकी अलगाववाद की समाप्ति-संयुक्त राज्य अमेरिका का नारा था कि अमेरिका सिर्फ अमेरिकनों के लिए है। युद्ध के पश्चात् इंग्लैण्ड यूरोप में अपनी पहले जैसी भूमिका का निर्वाह करने में सक्षम नहीं रहा था। टर्की तथा यूनान के संकट के दौरान उसको अक्षमता स्पष्ट हो गई थी। इस परिस्थिति में अमेरिका के लिए यह परमावश्यक हो गया था। कि वह अलगाववाद का परित्याग करके अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका का निर्वहन करे।

(3) राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्र में प्रतिस्पर्द्धा की विशिष्ट भावना साम्यवा सोवियत संघ तथा लोकतान्त्रिक अमेरिका के बीच जो राजनीतिक एवं आर्थिक प्रतिस्पर्द्धा अर्थ प्रतियोगिता की विशिष्ट भावना विद्यमान थी। उसने दोनों को अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में परस्पर एक-दूसरे के बढ़ते हुए प्रभाव को सन्तुलित करने के लिए विश्व राजनीति में अपने प्रभाव को बढ़ाने हेतु विवश कर दिया।

(4) परमाणु हथियारों की अंधी दौड़- सोवियत संघ का परमाणु शक्ति सम्पन्न हो जा भी विश्व में द्विध्रुवीय व्यवस्था को बढ़ाने हेतु एक महत्त्वपूर्ण उत्तरदायी कारण था। विश्व के अनेक देशों ने अपने आप को संयुक्त राज्य अमेरिका अथवा सोवियत संघ के गुट से सम्बद्ध कर दिया था। जहाँ अमेरिका ने साम्यवाद को नियन्त्रित करने के लिए कार्य किया वहीं सोवि संघ ने साम्यवाद के प्रसार हेतु कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।

(5) शीत युद्ध तथा समझौता राजनीति-संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ शीत युद्ध की शुरुआत के फलस्वरूप दोनों ही गुटों ने अपने-अपने अनुयायियों को संख्या बढ़ोत्तरी करना शुरू कर दिया पूर्वी यूरोप में सोवियत संघ ने और पश्चिमी यूरोप में सं राज्य अमेरिका ने अपनी-अपनी विचारधारा का प्रसार किया। इससे अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में द्विध्रुवीय व्यवस्था स्थापित होने में काफी मदद मिली।

 

प्रश्न 2. भारत-रूस के आपसी सम्बन्धों से भारत किस प्रकार लाभान्वित हुआ है?

उत्तर- भारत-रूस के आपसी सम्बन्धों से भारत निम्न प्रकार लाभान्वित हुआ-

(1) भारत को रूस से ऊर्जा संसाधनों एवं संयन्त्र, तेल और जीवाश्म ईंधन मिलता है जिससे हमारे देश की विभिन्न परियोजनाएँ सुचारु रूप से संचालित होती है।

(2) समय-समय पर भारत को रूस से युद्ध में प्रयुक्त होने वाले हथियारों की आपूर्ति होती है जिससे हमारे सैन्य बल नवीन तकनीकी एवं युद्ध सामग्री से सुसज्जित हुए हैं।

(3) रूस ने समय-समय पर हमें अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराई जिससे हमारा देश भारत आतंकवाद से सामना करने में और अधिक सक्षम हो पाया।

(4) रूस भारत के साथ चीनी शक्ति सन्तुलन को बनाए रखने तथा मध्य एशिया में भारतीय पहुँच बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निवर्हन करता चला आ रहा है।

(5) भारत को रूस में अपनी संस्कृति, भाषा, साहित्य तथा फिल्मों इत्यादि का प्रसार-प्रचार तथा विस्तार करने का काफी लाभ हुआ। रूस में सदैव भारतीय संस्कृति एवं साहित्य की प्रतिष्ठापूर्ण स्थिति रही है। रूस के घर-घर में जहाँ भारतीय फिल्मी कलाकारों को अच्छी तरह जाना जाता है वहीं हमारे देश के फिल्मी गीतों तथा गजलों की भी रूस में धूम मची रहती है।

Conclusion :-

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